Baisakhi 2021 : क्यों मानते है बैसाखी का त्यौहार ?

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बैसाखी का पर्व भी भारतवर्ष में बड़े हे धूमधाम से मनाया जाता है. इसे कैसे, क्यों और कब मानते है. इस के पीछे क्या धार्मिक कहानी है. इन सब को आज इस लेख में पढ़ेगे.

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Baisakhi 2021 : क्यों मानते है बैसाखी का त्यौहार ? जानिए इसका महत्व

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Baisakhi

हमारे देश में बहुत से त्यौहार मनाये जाते है जैसे दशहरा, दिवाली, लोहड़ी, तीज, होली, ईद, क्रिश्मस. वैसे ही रंग रंगीला पर्व है बैसाखी, कम लोगो को ही पता है ये कैसे और कब मानते है. इसके पीछे क्या धार्मिक कहानी जुडी है जिस वजह से हम, इस पर्व को मानते है. आज आप को इन सभी प्रश्नों के उत्तर इस लेख में मिल जायेगे. चलो शुरू करते है.

बैसाखी क्या है कब मानते है ?

जैसे हिन्दू, मुस्लिम, इसाई धर्म के त्यौहार है वैसे ही बैसाखी सिख धर्म के लोगो का ख़ास त्यौहार है. भारत में पंजाब प्रान्त में इसे ज्यादा खास तरीको से मनाया जाता है. पंजाब की भूमि में जब रबी की फसल पक जाती है तब ये त्यौहार मनाया जाता है.

यह पर्व फसल कटने और सिख धर्म के स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. जहां किसान फसल पकने की ख़ुशी में तो सिख धर्म के लोग खालसा पंथ के स्थापना की ख़ुशी में मानते है.

इस समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है इसलिए वैसाख महीने के पहले दिन को बैसाखी कहा जाता है, यह अप्रैल माह की 13 तारीख को मनाया जाता है. इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मेष सक्रांति भी कहा जाता है.

क्यों मनाते है बैसाखी

एक तो सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, दूसरा किसान भाई फसल पकने की खुशी में तो तीसरा इसके पीछे धार्मिक कारण भी है. सन 1969 में सिखों के दसवे गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी. इसमें “खालसा” खालिस शब्द से बना हा जिसका मतलब है – पवित्र, शुद्ध. इसके पीछे गुरु जी का लक्ष्य लोगो को मुगलों के अत्याचार से मुक्त करवाना था. यह कारण भी इस दिन को बहुत खास बना देता है और आज के दिन ही पंजाबी नया वर्ष की शुरआत होती है.

इसलिए पंजाब और हरियाणा में इसको मानते का विशेष कारण है.

कैसे मानते है Baisakhi

दिवाली की तरह इस की तैयारी भी पहले शुरु हो जाती है. लोगो घरों में सफाई करते है, रंगोली बनाते है लाइट लगाई जाती है. घरों में खूब पकवान बनाये जाते है. सिख धर्म के लोग सुबह स्नान करने के बाद गुरूद्वारे जाते है. वह पाठ और कीर्तन होता है. श्रद्धालु अरदास करते है. गुरु के लंगर में शामिल होता है.

 पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है. बच्चे, जवान और बूढ़े सभी ढोल की थाप पर नाच रहे होते है. वैसे तो ये पुरे भारत में मानते है परन्तु हरियाणा और पंजाब में इसका अलग ही उत्साह होता है.

हिन्दू धर्म के लोग इस दिन स्नान कर पूजा पाठ करते है है. इस दिन पवित्र नदियो में स्नान का अपना महत्व है. लोग अपने घर परिवार के सुख समृध्द की कामना करते है.

कृषि का पर्व है, बैसाखी

इस समय धूप तेज होती है और गर्मी शुरू हो जाती है. इसे मौसम के बदलाब का प्रतीक मानते है. तेज धुप की वजह से फसल पक चूकी होती है और कटने के लिए तैयार होती है इसलिए यह किसानो के लिए त्यौहार होता है. अब सर्दी खत्म हो जाती है और गर्मी शुरु होती है. इसको बदलते मोसम के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है.

अब आप को baisakhi के बारे में पता चल गया होगा. तो दोस्तों कैसे लगा आप को लेख comment करके जरुर बताइएगा, और आगे शेयर जरूर करे ताकि सभी लोगों को बैसाखी के त्योंहार के महत्व का ज्ञान हो सके.
बैसाखी की हार्दिक शुभकामनाए

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